अपराजिता संवाद: महिलाओं के लिए बनी योजनाओं को सियासत की नहीं, निगरानी की जरूरत

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अपराजिता संवाद: महिलाओं के लिए बनी योजनाओं को सियासत की नहीं, निगरानी की जरूरत

महिलाओं के लिए हर सरकार ने कई घोषणाएं की हैं, लेकिन धरातल पर उनकी हकीकत कुछ और ही हैं। कभी जागरूकता न होने के कारण लाभार्थी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, तो कभी सरकारी सिस्टम में अहम कड़ी जनप्रतिनिधि जरूरतमंदों तक सीधी पहुंच रखने के बावजूद उन्हें योजनाओं से नहीं जोड़ते। आवेदन की प्रक्रियाओं के जटिल होने के कारण भी आधे से अधिक लाभार्थी थक हारकर योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।

अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत ‘महिलाओं के लिए बनाई गई योजनाओं की धरातल पर स्थिति’ विषय को लेकर संवाद का आयोजन किया गया। शुक्रवार को अमर उजाला समाचार पत्र के पटेलनगर स्थित कार्यालय में पहुंची महिलाओं ने कहा कि नेताओं में योजनाओं का श्रेय लेने की होड़ रहती है। महिलाओं का कहना था कि योजनाओं पर सियासत की नहीं, बल्कि निगरानी की जरूरत है।

आय प्रमाणपत्र बनाना ही चुनौती

महिलाओं के लिए सरकार के पास कई योजनाएं हैं। प्रसूता पोषण योजना के तहत आने वाला सामान महिलाओं तक पहुंचता ही नहीं है। सबसे अहम योजनाओं का लाभ लेने के लिए आय प्रमाणपत्र बनाने की जरूरत पड़ती हैं, लेकिन इसे बनाने के लिए लाभार्थी धक्के खाते-खाते आखिरकार घर ही बैठ जाता है। और योजना तक वह पहुंच ही नहीं पाता। – किरन रावत कश्यप, जिला कार्यकारी अध्यक्ष, उक्रांद 

परिवहन सुविधा का अभाव

मैं दून, टिहरी उत्तराकाशी सहित कई दूर-दराज के ऐसे इलाकों में काम करती हूं जहां परिवहन की कोई सुविधा नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गांव में महिलाओं को आयरन की जो गोली दी जाती है, वह भी इन क्षेत्रों में नहीं बंटती हैं। परिवहन की सुविधा के अभाव में सामान पहुंचता ही नहीं है। सड़क से वंचित कई गांव की महिलाएं योजनाओं से भी वंचित हैं। – मेघा मल्ला, सामाजिक कार्यकर्ता

लाभार्थी तक लाभ पहुंचे

सरकार अपने स्तर पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। उन्हें योजनाओं का लाभ मिले ,यह भी सुनिश्चित करती है। हां, अगर कहीं कुछ कमी रह जाती है, तो हम उसे दूर कराने की कोशिश करेंगे। कोई भी योजनाओं से वंचित  न रहे, इसलिए योजनाओं की समीक्षा भी की जाती है। दूर-दराज के क्षेत्रों में भी महिलाओं को इसका लाभ मिल रहा है। – मधु भट्ट, प्रदेश मंत्री, भाजपा

सभी अपनी जिम्मेदारी समझें

योजनाएं बनने के बाद उन्हें धरातल पर अमल करने के लिए अलग-अलग लोगों को जिम्मेदारी दी गई है। इसलिए सभी को अपनी जिम्मेदारी समझने की जरूरत है। कितना काम किया गया और कितने लोगों को योजना का लाभ मिल रहा है, इस पर लगातार निगरानी होनी चाहिए। धरातल पर ईमानदारी से काम किया जाएगा तो यकीनन हर लाभार्थी को योजना को लाभ मिलेगा। – श्वेता राय तलवार, सामाजिक कार्यकर्ता

जनप्रतिनिधि जिम्मेदारी समझें

योजनाएं बहुत अच्छी बनाई गई हैं, लेकिन लोगों को उनसे जोड़ने की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों की भी है। जनप्रतिनिधि इसी लिए बनाए गए हैं, ताकि वह लोगों की समस्याओं को समझें और उनका समाधान करें। सरकार योजनाएं बनाने का काम कर रही है। जनप्रतिनिधियों को उन योजनाओं को लाभ लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए काम करना चाहिए। – मंजू नेगी, क्षेत्र पंचायत सदस्य, मेहूंवाला

संपन्न लोग ले रहे लाभ

हर सरकार योजनाएं बनाती हैं, लेकिन उसका फायदा जरूरतमंद तक पहुंचा या नहीं इस पर ध्यान नहीं देती। कई बार योजनाओं का लाभ जरूरतमंद को न मिलकर संपन्न लोगों को मिल रहा है। जरूरतमंद भटकते रहते हैं, लेकिन कागजी कार्रवाई ही पूरी नहीं होती। जिस वर्ग के लिए योजना बनाई गई, वही उसका लाभ ले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। – गीता बिष्ट, पूर्व उपप्रधान, आरकेडिया

लगाने पड़ते हैं कई चक्कर

घरों में काम करने वाली एक महिला मेरी परिचित थी। सरकारी योजना के तहत अनुदान पाने के लिए उसे आय प्रमाण पत्र बनवाना था। वह पार्षद के पास कई बार गई। इसके बावजूद पार्षद ने मुहर नहीं लगाई। आखिरकार वह योजना का लाभ नहीं ले पाई। इसी तरह कई लाभार्थी वंचित रह जाते हैं। योजनाएं तो हैं लेकिन हकीकत कुछ और होती है। – अनुराधा सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता

जानकारी पहुंचती नहीं 

जिन बस्तियों में मैं काम कर रही हूं, वहां सरकार की योजनाओं को बताने वाला ही कोई नहीं है। यहां शिक्षा का भी अभाव है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि महिलाएं जागरूक नहीं होना चाहती। महिलाएं खुद को जागरूक रखने के लिए हमारे हर अभियान से जुड़ती हैं। सरकारी योजनाओं का हर क्षेत्र में प्रचार-प्रसार होना चाहिए। – तस्नीमा कौसर, सामाजिक कार्यकर्ता

फायदा सबको नहीं

हमारे देश में योजनाएं कई साल से बन रही हैं, लेकिन उनका फायदा बहुत कम दिखाई देता है। भ्रष्टाचार ज्यादा है। योजनाएं बनाई जा रही हैं  लेकिन सफल कितनी हो रही हैं यह हम सभी देख रही हैं। अगर योजनाओं का लाभ महिलाओं तक पहुंच रहा होता तो बदलाव हमारे सामने होते। सिर्फ कागजों में योजनाओं का लाभ दिखाया जाता है।  – त्रिशला मलिक, एडवोकेट

पैसा ही घटा दिया

कभी नंदा देवी और नंदा गौरा योजना अलग-अलग थी, लेकिन अब इस योजना को एक कर दिया गया। योजना का पैसा भी आधा कर दिया गया। इसके अलावा महिला सुरक्षा के लिए पैनिक बटन का एलान किया गया था लेकिन यह कहीं दिखाई नहीं देता। पौष्टिक योजना हो या घसियारी योजना, गांव की महिलाओं तक जानकारी पहुंचनी चाहिए।  – कोमल वोहरा, कांग्रेस पार्षद

जागरूकता सबसे जरूरी

बहुत अच्छी योजनाएं सरकारों द्वारा बनाई गई है, लेकिन मुझे लगता है कि जागरूकता का एक बड़ा अभाव है। जिस कारण योजनाएं जरूरतमंदों तक पहुंचती नहीं हैं। जनप्रतिनिधियों और मीडिया के माध्यम से जागरूकता का काम किया जाना चाहिए। ताकि अधिक से अधिक महिलाओं तक योजना का लाभ पहुंचे।  – हीना खान, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, अल्पसंख्यक मोर्चा

आवेदन प्रक्रिया आसान हो

योजनाओं के प्रचार-प्रसार की सख्त जरूरत है। सही तरीके से प्रचार होना भी जरूरी है। इसके अलावा योजनाओं के आवेदन की प्रक्रिया आसान होनी चाहिए। कई बार तकनीकी दिक्कतों की वजह से लाभार्थी आवेदन नहीं कर पाते। तो कई बार प्रक्रिया इतनी जटिल होती है कि लाभार्थी ही परेशान हो जाता है। आवेदन की भाषा आसान होनी चाहिए।  – बीरू बिष्ट, सामाजिक कार्यकर्ता

दिक्कतों को भी समझा जाए

समाज कल्याण विभाग से संबंधित योजनाओं में जो अनुदान है,  ग्रामीण क्षेत्रों में उसके मानदंड अलग हैं। इसके लिए आय का प्रमाणपत्र जरूरी है।  इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए 1200 रुपये मासिक आय की अर्हता है जो बाद में चार हजार रुपये मासिक कर दी गई। जो जागरूक हैं वह आय का प्रमाणपत्र बना रहे हैं, लेकिन अधिकतर इससे वंचित हैं। – सुरेंद्र नेगी, सामाजिक कार्यकर्ता

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