Haldwani: संपत्ति के लिए पति और बेटा बन किए कई जतन, चार दिन बाद सामने आया सच, ऐसे हुआ पूनम का अंतिम संस्कार

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Haldwani: संपत्ति के लिए पति और बेटा बन किए कई जतन, चार दिन बाद सामने आया सच, ऐसे हुआ पूनम का अंतिम संस्कार


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उत्तराखंड पुलिस
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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तीन दिन से जिस पूनम अलका सिंह का शव वारिस विवाद के चलते मोर्चरी में रखा हुआ था शनिवार को पुलिस की निगरानी में ईसाई पद्धति से उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। पूनम का शव लेने के लिए सामने आए दोनों परिवारों में से कोई भी अपना वारिसाना हक साबित नहीं कर पाया। इस वजह से पूनम की संपत्ति पुलिस के सुपुर्द कर दी गई है। कोर्ट के फैसले के बाद ही संपत्ति और अन्य चीजें वारिस को सौंपी जा सकेंगी।

काठगोदाम निवासी पूनम अलका सिंह (59) की आठ नवंबर को कैंसर से मौत हो गई थी। इसके बाद पूनम को अपना बताने वाले दो पक्ष सामने आए थे। पहले पक्ष के युवक सन्नी सिंह का कहना था कि पूनम उनकी सौतेली मां हैं और दूसरे पक्ष के राजू डेनियल का कहना था कि पूनम उनकी पत्नी थीं। चार दिन तक यह विवाद चलता रहा। पांचवें दिन जब पूनम के जन्म से ही ईसाई होने की पुष्टि हुई तो सब हैरान रह गए।

शनिवार को नॉर्थ इंडिया रीजनल कॉस्पेंट मेथोडिस्ट चर्च इंडिया बरेली इपिस्कोप एरिया के वरिष्ठ पादरी आईसी लाल ने सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह के सामने पूनम का चर्च सदस्यता प्रमाणपत्र रखा। बताया कि पूनम के पिता प्रवीन चंद्र और मां डॉरिस प्रवीन ईसाई थे। पूनम भी जन्म से ईसाई ही थीं और काठगोदाम स्थित सेंट्रल मेथोडिस्ट चर्च की सदस्य थीं।

इनके अलावा सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे दोनों पक्ष अपनी दावेदारी साबित नहीं कर पाए। उनके पेश किए दस्तावेजों को सिटी मजिस्ट्रेट ने निराधार बताते हुए पूनम के शव को पुलिस के सुपुर्द कर दिया। ईसाई पद्धति से अंतिम संस्कार करने के निर्देश दिए। शनिवार की देर शाम पूनम के शव को ताबूत में रखकर ईसाई पद्धति के अनुसार पुलिस और वरिष्ठ पादरी की मौजूदगी में दफन किया गया।

कोई प्रधान का पत्र लाया तो किसी ने दिखाया शादी का प्रमाण
सिटी मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों को अपना वारिसाना हक साबित करने के लिए दो दिन का समय दिया था। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि खुद को पूनम का बेटा बताने वाला सन्नी ग्राम प्रधान का लिखा पत्र लेकर आया था। इसमें उसने इस बात को दर्शाया था कि पूनम की शादी उसके पिता से हुई थी और वह उसकी सौतेली मां थी। राजू डेनियल ने शादी का प्रमाणपत्र पेश किया। अधिकारियों ने जब जांच की तो प्रमाणपत्र पर पूनम के पति का नाम डेनियल यूनुस मसीह लिखा था। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने दोनों तथ्यों को निराधार बताया और कोर्ट के फैसले के बाद संपत्ति सुपुर्द करने के निर्देश दिए।

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वारिसाना हक साबित न होने पर पूनम की संपत्ति को काठगोदाम पुलिस के सुपुर्द कर दिया है। पूनम के घर में रखे असलहे काठगोदाम पुलिस ने जब्त कर घर में ताला डाल दिया है। बैंक और डाकघर खातों व बीमा पॉलिसियों को भी फ्रीज कर दिया गया है। कोर्ट में जो भी व्यक्ति अपना वारिसाना हक साबित कर देगा। संपत्ति और बैंक-बीमा राशि की सुपुर्दगी कोर्ट के आदेश पर उसे ही की जाएगी। -ऋचा सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट, हल्द्वानी।

विस्तार

तीन दिन से जिस पूनम अलका सिंह का शव वारिस विवाद के चलते मोर्चरी में रखा हुआ था शनिवार को पुलिस की निगरानी में ईसाई पद्धति से उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। पूनम का शव लेने के लिए सामने आए दोनों परिवारों में से कोई भी अपना वारिसाना हक साबित नहीं कर पाया। इस वजह से पूनम की संपत्ति पुलिस के सुपुर्द कर दी गई है। कोर्ट के फैसले के बाद ही संपत्ति और अन्य चीजें वारिस को सौंपी जा सकेंगी।

काठगोदाम निवासी पूनम अलका सिंह (59) की आठ नवंबर को कैंसर से मौत हो गई थी। इसके बाद पूनम को अपना बताने वाले दो पक्ष सामने आए थे। पहले पक्ष के युवक सन्नी सिंह का कहना था कि पूनम उनकी सौतेली मां हैं और दूसरे पक्ष के राजू डेनियल का कहना था कि पूनम उनकी पत्नी थीं। चार दिन तक यह विवाद चलता रहा। पांचवें दिन जब पूनम के जन्म से ही ईसाई होने की पुष्टि हुई तो सब हैरान रह गए।

शनिवार को नॉर्थ इंडिया रीजनल कॉस्पेंट मेथोडिस्ट चर्च इंडिया बरेली इपिस्कोप एरिया के वरिष्ठ पादरी आईसी लाल ने सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह के सामने पूनम का चर्च सदस्यता प्रमाणपत्र रखा। बताया कि पूनम के पिता प्रवीन चंद्र और मां डॉरिस प्रवीन ईसाई थे। पूनम भी जन्म से ईसाई ही थीं और काठगोदाम स्थित सेंट्रल मेथोडिस्ट चर्च की सदस्य थीं।

इनके अलावा सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे दोनों पक्ष अपनी दावेदारी साबित नहीं कर पाए। उनके पेश किए दस्तावेजों को सिटी मजिस्ट्रेट ने निराधार बताते हुए पूनम के शव को पुलिस के सुपुर्द कर दिया। ईसाई पद्धति से अंतिम संस्कार करने के निर्देश दिए। शनिवार की देर शाम पूनम के शव को ताबूत में रखकर ईसाई पद्धति के अनुसार पुलिस और वरिष्ठ पादरी की मौजूदगी में दफन किया गया।





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