Ukraine Crisis: हरीश रावत ने जताई चिंता, कहा- प्रधानमंत्री देशवासियों को करें आश्वस्त, फंसे लोगों को लाएंगे सुरक्षित

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Ukraine Crisis: हरीश रावत ने जताई चिंता, कहा- प्रधानमंत्री देशवासियों को करें आश्वस्त, फंसे लोगों को लाएंगे सुरक्षित


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Sat, 26 Feb 2022 10:02 AM IST

सार

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि भारतीय नागरिकों को निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले जाना केंद्र सरकार का पहला दायित्य था।

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यूक्रेन मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत सरकार निश्चित तौर पर बातचीत कर रही होगी, लेकिन प्रधानमंत्री को देशवासियों को आश्वस्त करना चाहिए कि वहां फंसे नागरिकों को निकालने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
 

देश की धरती से तीसरे विश्व युद्ध की भूमिका बन रही
पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि यूरोपीय देश की धरती से तीसरे विश्व युद्ध की भूमिका बन रही है। यह अचानक नहीं हुआ है, लंबे समय से ऐसी स्थितियां बन रही थीं। पिछले कुछ हफ्तों से तो स्पष्ट लग रहा था कि युद्ध होगा। ऐसी स्थिति में भारतीय नागरिकों को निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले जाना, केंद्र सरकार का पहला दायित्य था। उत्तरखंड के भी तमाम छात्र वहां अध्ययन करने गए हैं, वह भी फंसे हैं।

उनके मां-बाप और प्रत्येक देशवासी बहुत चिंतित है। वहां छात्र बहुत दिक्कत में हैं। केंद्र सरकार ही बातचीत कर वहां फंसे छात्रों को निकाल सकती है। कहा कि हमें अपनी अर्थव्यवस्था की भी चिंता करनी चाहिए। यूक्रेन के साथ हमारे आर्थिक स्वार्थ बहुत गहराई से जुड़े हैं। भारत की अर्थव्यवस्था पर निश्चित तौर पर इस युद्ध का दुष्प्रभाव पड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री को देश को आश्वस्त करना चाहिए कि किस प्रकार से सरकार इस दुष्प्रभाव को रोकने के लिए कदम उठाने जा रही है।

विस्तार

यूक्रेन मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत सरकार निश्चित तौर पर बातचीत कर रही होगी, लेकिन प्रधानमंत्री को देशवासियों को आश्वस्त करना चाहिए कि वहां फंसे नागरिकों को निकालने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

 

देश की धरती से तीसरे विश्व युद्ध की भूमिका बन रही

पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि यूरोपीय देश की धरती से तीसरे विश्व युद्ध की भूमिका बन रही है। यह अचानक नहीं हुआ है, लंबे समय से ऐसी स्थितियां बन रही थीं। पिछले कुछ हफ्तों से तो स्पष्ट लग रहा था कि युद्ध होगा। ऐसी स्थिति में भारतीय नागरिकों को निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले जाना, केंद्र सरकार का पहला दायित्य था। उत्तरखंड के भी तमाम छात्र वहां अध्ययन करने गए हैं, वह भी फंसे हैं।

उनके मां-बाप और प्रत्येक देशवासी बहुत चिंतित है। वहां छात्र बहुत दिक्कत में हैं। केंद्र सरकार ही बातचीत कर वहां फंसे छात्रों को निकाल सकती है। कहा कि हमें अपनी अर्थव्यवस्था की भी चिंता करनी चाहिए। यूक्रेन के साथ हमारे आर्थिक स्वार्थ बहुत गहराई से जुड़े हैं। भारत की अर्थव्यवस्था पर निश्चित तौर पर इस युद्ध का दुष्प्रभाव पड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री को देश को आश्वस्त करना चाहिए कि किस प्रकार से सरकार इस दुष्प्रभाव को रोकने के लिए कदम उठाने जा रही है।



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