Uttarakhand Election 2022: कभी-कभी पीड़ा व्यक्त करना भी पार्टी के लिए लाभदायक होता है- हरीश रावत

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Uttarakhand Election 2022: कभी-कभी पीड़ा व्यक्त करना भी पार्टी के लिए लाभदायक होता है- हरीश रावत

 

सार

हरीश रावत के ट्वीट के बाद दिल्ली दरबार में लगी पंचायत में रावत की वरिष्ठता पर फिर मुहर लग गई है। चुनाव प्रचार अभियान के अध्यक्ष के तौर पर रावत की ही अगुवाई में चुनाव लड़ा जाएगा।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि कभी पीड़ा व्यक्त करना भी पार्टी के लिए लाभदायक होता है। शनिवार को उन्होंने मीडिया से बात की। कहा कि जैसे बीसीसीआई है वैसे ही एआईसीसी भी मालिक है। जो पार्टी के प्रभारी हैं वह कोच हैं, लेकिन कप्तान का भी अपना स्थान है। इन तीनों के बीच एक विश्वास और समझ का रिश्ता होना चाहिए। मैंने जो भी कहा वह जीतने के लिए कहा। इसके साथ ही हरीश रावत ने विधानसभा चुनाव को लेकर कुछ सुधार की भी बात कही। हरीश रावत ने कहा कि अगर चुनाव जीतना है तो कुछ सुधार भी करने होंगे।

वहीं हरीश रावत ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की शुभकामनाओं के ट्वीट पर कहा कि मैं उनकी शुभकामनाएं स्वीकार करता हूं। मुझे लगता है कि कहीं न कहीं उन्हें अभी भी लग रहा है कि कांग्रेस छोड़ना एक गलती थी। जैसे अमरिंदर सिंह अपने मालिक का अनुसरण कर रहे हैं वैसे ही मनीष तिवारी भी सिर्फ अपने मालिक (अमरिंदर) का अनुसरण कर रहे हैं।

हरीश के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगी कांग्रेस
हरीश रावत के ट्वीट के बाद दिल्ली दरबार में लगी पंचायत में रावत की वरिष्ठता पर फिर मुहर लग गई है। चुनाव प्रचार अभियान के अध्यक्ष के तौर पर रावत की ही अगुवाई में चुनाव लड़ा जाएगा। जबकि मुख्यमंत्री का फैसला चुनाव के नतीजे आने के बाद ही होगा। उत्तराखंड से पहुंचे नेताओं की पहले राहुल गांधी के साथ अलग अलग मुलाकात हुई, फिर सामूहिक रूप से महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल के साथ बैठक हुई। बैठक के बाद एक साथ बाहर आए नेताओं ने संदेश दिया कि सब ठीक है।

हरीश रावत ने कहा कि तय हुआ है कि मैं सीएलपी लीडर के तौर पर काम करूंगा और सब लोग उस काम में सहयोग देंगे। हरीश रावत ने संगठन के कामकाज और अपनी उपेक्षा को लेकर जो सवाल उठाए थे, उन्हें लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास पर तीन घंटे तक मैराथन बैठक हुई। राहुल ने सबसे पहले हरीश रावत को अकेले बुलाकर उनका पक्ष जाना। बताते हैं कि रावत को इस बात पर ऐतराज था कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी उनकी उपेक्षा कर रहे हैं। रावत ने हाल में लिए गए कुछ फैसलों का हवाला भी दिया, जिनमें उन्हें अलग थलग रखा गया।

Harak Singh Rawat: महत्वाकांक्षी हरक सिंह रावत को आखिर ऐन चुनाव से पहले ही गुस्सा क्यों आता है?

जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी ने स्पष्ट तौर उन्हें आश्वस्त किया कि चुनाव उनकी अगुवाई में ही होगा, लेकिन मुख्यमंत्री पर फैसला परंपरा के अनुरूप विधायक ही तय करेंगे। पार्टी किसी को बतौर सीएम चेहरा प्रोजेक्ट कर चुनाव नहीं लड़ेगी। राहुल ने रावत के बाद प्रभारी देवेंद्र यादव से भी करीब आधा घंटे बातकर उन सवालों के जवाब टटोले जो रावत ने उठाए थे। प्रभारी ने राज्य के अन्य नेताओं और अपना पक्ष रखा। इसके बाद बारी बारी यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, सांसद प्रदीप टम्टा, राज्य की सह प्रभारी दीपिका पांडेय, विधायक काजी निजामुद्दीन, गोविंद कुंजवाल, करण माहरा ने भी अपनी बात रखी।

राहुल गांधी से मुलाकात और अपनी बात रखने के बाद राज्य के नेताओं की संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ बैठक हुई। बैठक में वेणुगोपाल ने मिलजुल कर चुनाव जीतने की रणनीति बनाने की बात कही। इसी दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने महासचिव संगठन से आपत्ति जताई कि उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार इसी बैठक में गोदियाल ने यहां तक कह दिया कि अगर उन्हें फैसले लेने का अधिकार नहीं दिया जाएगा तो वे इस्तीफा सौंपने को तैयार हैं। इस पर वेणुगोपाल ने उन्हें भरोसा दिलाया और अन्य नेताओं ने भी हस्तक्षेप कर शांत किया। हालांकि अमर उजाला से बातचीत में गोदियाल ने कहा कि मैंने इस्तीफा देने से संबंधित कोई भी बात नहीं की।

मैंने पहले ही कहा था कि एक-दो दिन रूक जाइए, इस पूरे घटनाक्रम के सुखद परिणाम सामने आएंगे। हरीश रावत को चुनाव कैंपेन में फ्रीहेंड दिया गया है। सभी लोग उनका सहयोग करेेंगे। जहां तक संगठन स्तर की बात है तो इस बारे में भी चर्चा हुई है, बहुत जल्दी संगठन स्तर पर बड़े बदलाव किए जाएंगे। हम हरीश रावत के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगे और उत्तराखंड में जीत दर्ज करेंगे। जहां तक मेरे इस्तीफा दिए जाने की बात है, मैंने ऐसी कोई बात नहीं कही है।
– गणेश गोदियाल, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस पार्टी

विस्तार

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि कभी पीड़ा व्यक्त करना भी पार्टी के लिए लाभदायक होता है। शनिवार को उन्होंने मीडिया से बात की। कहा कि जैसे बीसीसीआई है वैसे ही एआईसीसी भी मालिक है। जो पार्टी के प्रभारी हैं वह कोच हैं, लेकिन कप्तान का भी अपना स्थान है। इन तीनों के बीच एक विश्वास और समझ का रिश्ता होना चाहिए। मैंने जो भी कहा वह जीतने के लिए कहा। इसके साथ ही हरीश रावत ने विधानसभा चुनाव को लेकर कुछ सुधार की भी बात कही। हरीश रावत ने कहा कि अगर चुनाव जीतना है तो कुछ सुधार भी करने होंगे।

वहीं हरीश रावत ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की शुभकामनाओं के ट्वीट पर कहा कि मैं उनकी शुभकामनाएं स्वीकार करता हूं। मुझे लगता है कि कहीं न कहीं उन्हें अभी भी लग रहा है कि कांग्रेस छोड़ना एक गलती थी। जैसे अमरिंदर सिंह अपने मालिक का अनुसरण कर रहे हैं वैसे ही मनीष तिवारी भी सिर्फ अपने मालिक (अमरिंदर) का अनुसरण कर रहे हैं।

हरीश के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगी कांग्रेस

हरीश रावत के ट्वीट के बाद दिल्ली दरबार में लगी पंचायत में रावत की वरिष्ठता पर फिर मुहर लग गई है। चुनाव प्रचार अभियान के अध्यक्ष के तौर पर रावत की ही अगुवाई में चुनाव लड़ा जाएगा। जबकि मुख्यमंत्री का फैसला चुनाव के नतीजे आने के बाद ही होगा। उत्तराखंड से पहुंचे नेताओं की पहले राहुल गांधी के साथ अलग अलग मुलाकात हुई, फिर सामूहिक रूप से महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल के साथ बैठक हुई। बैठक के बाद एक साथ बाहर आए नेताओं ने संदेश दिया कि सब ठीक है।

हरीश रावत ने कहा कि तय हुआ है कि मैं सीएलपी लीडर के तौर पर काम करूंगा और सब लोग उस काम में सहयोग देंगे। हरीश रावत ने संगठन के कामकाज और अपनी उपेक्षा को लेकर जो सवाल उठाए थे, उन्हें लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास पर तीन घंटे तक मैराथन बैठक हुई। राहुल ने सबसे पहले हरीश रावत को अकेले बुलाकर उनका पक्ष जाना। बताते हैं कि रावत को इस बात पर ऐतराज था कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी उनकी उपेक्षा कर रहे हैं। रावत ने हाल में लिए गए कुछ फैसलों का हवाला भी दिया, जिनमें उन्हें अलग थलग रखा गया।

Harak Singh Rawat: महत्वाकांक्षी हरक सिंह रावत को आखिर ऐन चुनाव से पहले ही गुस्सा क्यों आता है?

जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी ने स्पष्ट तौर उन्हें आश्वस्त किया कि चुनाव उनकी अगुवाई में ही होगा, लेकिन मुख्यमंत्री पर फैसला परंपरा के अनुरूप विधायक ही तय करेंगे। पार्टी किसी को बतौर सीएम चेहरा प्रोजेक्ट कर चुनाव नहीं लड़ेगी। राहुल ने रावत के बाद प्रभारी देवेंद्र यादव से भी करीब आधा घंटे बातकर उन सवालों के जवाब टटोले जो रावत ने उठाए थे। प्रभारी ने राज्य के अन्य नेताओं और अपना पक्ष रखा। इसके बाद बारी बारी यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, सांसद प्रदीप टम्टा, राज्य की सह प्रभारी दीपिका पांडेय, विधायक काजी निजामुद्दीन, गोविंद कुंजवाल, करण माहरा ने भी अपनी बात रखी।

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