Uttarakhand New Nazul policy | नजूल नीति पर नैनीताल हाईकोर्ट से लगी रोक सुप्रीम कोर्ट ने हटाई, लाखों लोगों को मिलेगा भूमि पर मालिकाना हक

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Uttarakhand New Nazul policy | नजूल नीति पर नैनीताल हाईकोर्ट से लगी रोक सुप्रीम कोर्ट ने हटाई, लाखों लोगों को मिलेगा भूमि पर मालिकाना हक

सार

2009 में राज्य सरकार ने नजूल नीति बनाई थी। इसके तहत नजूल भूमि पर रह रहे लोगों के हक में नजराना देकर फ्री होल्ड की कार्यवाही होनी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में नजूल नीति को निरस्त करने के नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। उत्तराखंड सरकार की ओर से विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रुद्रपुर में नजूल भूमि पर बसे 22 हजार परिवारों, हल्द्वानी की करीब 80 फीसदी आबादी के साथ ही प्रदेश में नजूल पर बसे लाखों लोगों को भूमि का मालिकाना हक मिलने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।

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2009 में राज्य सरकार ने नजूल नीति बनाई थी। इसके तहत नजूल भूमि पर रह रहे लोगों के हक में नजराना देकर फ्री होल्ड की कार्यवाही होनी थी। सरकार के इस आदेश को कुछ लोगों की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। नैनीताल हाईकोर्ट ने 2018 में नजूल नीति को गलत बताते हुए निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि जिन लोगों के हक में फ्री होल्ड इस नीति के तहत किया है उसको भी निरस्त कर नजूल भूमि को सरकार के खाते में निहित करें। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि कोई नई नीति सरकार नहीं ला सकती है।

हाईकोर्ट के आदेश को उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर चुनौती दी थी। इसके साथ ही रुद्रपुर निवासी सुनीता ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कहा था कि राज्य सरकार की नीति के तहत उन्होंने भूमि को फ्री होल्ड किया था लेकिन उन्हें बिना सुने हाईकोर्ट ने आदेश पारित कर दिया।

शहर 80 फीसदी हिस्सा नजूल भूमि पर बसा है। नैनीताल रोड पर हल्द्वानी से लेकर काठगोदाम क्षेत्र में 39 लाख 66 हजार 125 वर्ग मीटर नजूल भूमि दर्ज की गई है। नजूल भूमि पर दशकों से लोग काबिज हैं। नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त  बिजेंद्र चौहान ने बताय कि नैनीताल रोड के पूरब तरफ की जमीन और मंडी तक का इलाका नजूल भूमि है। इसी प्रकार भोलानाथ गार्डन की 59 बीघा जमीन और भवालीगंज का क्षेत्र नजूल भूमि हैं।

रुद्रपुर में 22 हजार परिवार हैं नजूल भूमि पर काबिज
जिस समय नजूल नीति बनाई गई थी, तब रुद्रपुर में नजूल पर बसे परिवारों की संख्या करीब 14 हजार थीं, जो कि अब बढ़कर करीब 22 हजार हो चुकी है। भाजपा जिलाध्यक्ष शिव अरोरा ने कहा कि नजूल नीति पर उच्च न्यायालय के रोक संबंधी आदेश पर सर्वोच्च न्यायालय से रोक लगने से रुद्रपुर में नजूल भूमि पर बसे करीब 22 हजार परिवारों को मालिकाना हक मिलेगा।

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में नजूल नीति को निरस्त करने के नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। उत्तराखंड सरकार की ओर से विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रुद्रपुर में नजूल भूमि पर बसे 22 हजार परिवारों, हल्द्वानी की करीब 80 फीसदी आबादी के साथ ही प्रदेश में नजूल पर बसे लाखों लोगों को भूमि का मालिकाना हक मिलने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।

2009 में राज्य सरकार ने नजूल नीति बनाई थी। इसके तहत नजूल भूमि पर रह रहे लोगों के हक में नजराना देकर फ्री होल्ड की कार्यवाही होनी थी। सरकार के इस आदेश को कुछ लोगों की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। नैनीताल हाईकोर्ट ने 2018 में नजूल नीति को गलत बताते हुए निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि जिन लोगों के हक में फ्री होल्ड इस नीति के तहत किया है उसको भी निरस्त कर नजूल भूमि को सरकार के खाते में निहित करें। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि कोई नई नीति सरकार नहीं ला सकती है।

हाईकोर्ट के आदेश को उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर चुनौती दी थी। इसके साथ ही रुद्रपुर निवासी सुनीता ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कहा था कि राज्य सरकार की नीति के तहत उन्होंने भूमि को फ्री होल्ड किया था लेकिन उन्हें बिना सुने हाईकोर्ट ने आदेश पारित कर दिया।

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